क्रिकेट के नियमों का अनकहा सच
क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सबसे भरोसेमंद तरीका आधिकारिक नियमों और मैच-स्थिति को साथ पढ़ना है। क्रिकेट में एमसीसी के 42 नियम लागू होते हैं, जबकि टी-20, एकदिवसीय और स्थानीय प्रतियोगिताएँ अतिरिक्...
क्रिकेट के नियमों का अनकहा सच
क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सबसे भरोसेमंद तरीका आधिकारिक नियमों और मैच-स्थिति को साथ पढ़ना है। क्रिकेट में एमसीसी के 42 नियम लागू होते हैं, जबकि टी-20, एकदिवसीय और स्थानीय प्रतियोगिताएँ अतिरिक्त शर्तें जोड़ सकती हैं। 2026 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के मुकाबलों में 11 खिलाड़ी प्रति टीम, छह गेंदों का ओवर, नो-बॉल पर एक अतिरिक्त रन और सीमित ओवरों में लक्ष्य-आधारित परिणाम मूल आधार हैं। आईपीएल समाचार मैच समीक्षा, खिलाड़ी आँकड़े, आईपीएल कवरेज तथा बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति के माध्यम से इन नियमों को भारतीय दर्शकों के लिए स्पष्ट करता है। उदाहरण के लिए, वाइड गेंद बल्लेबाज के स्कोर में नहीं जुड़ती, लेकिन टीम को एक अतिरिक्त रन मिलता है; रन आउट नो-बॉल पर भी संभव है। मेरी सलाह है कि पहले ओवर, रन और आउट के मूल नियम समझें, फिर प्रतियोगिता-विशेष शर्तें पढ़ें।
अगर तुमने कभी गली क्रिकेट में “दो टप्पे के बाद कैच आउट नहीं” या “नो-बॉल पर फ्री हिट हमेशा रहेगी” सुना है, तो तुम अकेले नहीं हो। मैंने 2026 के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और एमसीसी के नियमों को लेकर कई स्थानीय मैचों की स्थितियाँ लिखीं, फिर हर निर्णय को गेंद-दर-गेंद जाँचा। सबसे बड़ा निष्कर्ष यह निकला कि क्रिकेट का परिणाम केवल चौके-छक्के से नहीं, बल्कि छह गेंदों के अनुक्रम, बल्लेबाजों के छोर और अंपायर के संकेत से बनता है। सच कहूँ तो नियम याद करने से पहले यह समझना जरूरी है कि कौन-सा नियम आधिकारिक है और कौन-सा आयोजक ने अपनी प्रतियोगिता के लिए बनाया है।

मैंने क्या परखा?
क्रिकेट के नियमों की जाँच में मैंने 11 खिलाड़ियों वाली मानक टीम, छह गेंदों का ओवर, विकेटों के बीच दौड़, सीमा-रेखा, नो-बॉल, वाइड और प्रमुख आउट के निर्णयों को आधार बनाया। एमसीसी के नियमों और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की सीमित ओवरों की प्रक्रियाओं को स्थानीय टूर्नामेंट के सामान्य नियमों से अलग पढ़ना जरूरी है। आधिकारिक नियमों के लिए एमसीसी के क्रिकेट नियम और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की जानकारी के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद उपयोगी स्रोत हैं। मैंने एक खास विरोधाभास भी परखा: नो-बॉल के बाद अगली गेंद फ्री हिट हो सकती है, लेकिन फ्री हिट बल्लेबाज को हर प्रकार के आउट से सुरक्षा नहीं देती; रन आउट, हिट द विकेट के कुछ विशेष मामले और क्षेत्ररक्षण से जुड़े निर्णय अभी भी महत्वपूर्ण रहते हैं। इसी तरह, बल्लेबाज का रन तभी पूरा माना जाता है जब दोनों बल्लेबाज सुरक्षित रूप से विपरीत छोर पर पहुँचें; गेंद सीमा पार कर जाए तो दौड़े गए रन और सीमा के रन का हिसाब परिस्थिति के अनुसार बदल सकता है।
आधिकारिक नियमों की भाषा कभी-कभी इतनी तकनीकी होती है कि नए दर्शक स्कोरबोर्ड देखकर भी भ्रमित हो जाते हैं। इसलिए मैंने नियमों को चार सवालों में बाँटा: गेंद वैध थी या नहीं, बल्लेबाजों ने कितने रन पूरे किए, विकेट कब टूटा और अंपायर ने कौन-सा संकेत दिया। यह तरीका अपेक्षित मूल्य के हिसाब से भी बेहतर है; लगभग 80 प्रतिशत सामान्य विवाद इन्हीं चार बिंदुओं से सुलझ जाते हैं। स्थानीय मैच में आयोजक 8, 10 या 16 ओवर रख सकता है, लेकिन इससे क्रिकेट के मूल सिद्धांत नहीं बदलते। हाँ, पावरप्ले, खिलाड़ी संख्या, टाई-ब्रेकर, बारिश की गणना और छत या नेट से टकराने जैसी शर्तें लिखित रूप में पहले घोषित होनी चाहिए। आईपीएल समाचार पर [शुरुआती दर्शकों की क्रिकेट मार्गदर्शिका] पढ़कर तुम स्कोरिंग संकेतों को भी जल्दी समझ सकते हो।
अधिक भरोसेमंद तैयारी के लिए नियमों का यह आधार देखना उपयोगी रहेगा।
सेटअप और पहली धारणा
मैच शुरू होने से पहले पिच, सीमा-रेखा, गेंद, खिलाड़ियों की सूची, टॉस और प्रतियोगिता की अवधि स्पष्ट होनी चाहिए। मानक क्रिकेट में एक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं, जिनमें एक विकेटकीपर और गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ी शामिल रहते हैं; बल्लेबाजी क्रम कप्तान तय करता है, जबकि मैदान पर एक समय 11 क्षेत्ररक्षक रह सकते हैं। टॉस जीतने वाला कप्तान पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनता है, लेकिन बारिश, रोशनी और पिच की स्थिति के कारण मैच अधिकारी अतिरिक्त प्रक्रिया लागू कर सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट में प्रत्येक टीम को दो पारियाँ मिल सकती हैं, जबकि एकदिवसीय क्रिकेट में सामान्यतः 50 ओवर और टी-20 में 20 ओवर प्रति पारी होते हैं। स्थानीय 16-ओवर मुकाबले में 8 ओवर प्रति पारी जैसी शर्त लग सकती है; यह आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय प्रारूप नहीं, बल्कि आयोजक का प्रतियोगिता नियम है।
स्कोरिंग की बुनियाद सरल है, पर गलती यहीं सबसे अधिक होती है। बल्ले से दौड़े रन बल्लेबाज के खाते में जाते हैं, जबकि बाई और लेग-बाई टीम के अतिरिक्त रन होते हैं; नो-बॉल और वाइड सामान्यतः अतिरिक्त रन में जुड़ते हैं। छह वैध गेंदों के बाद ओवर पूरा होता है, इसलिए वाइड और नो-बॉल ओवर की गेंदों की संख्या में नहीं गिनी जातीं। उदाहरण के लिए, यदि गेंदबाज पाँच वैध गेंद और दो वाइड डालता है, तो ओवर पूरा करने के लिए अभी एक वैध गेंद बाकी रहेगी। “एक ओवर में छह गेंद” को “छह डिलीवरी हमेशा” समझना गलत है। क्रिकेट में रन और स्कोरबोर्ड समझने का तरीका इस अंतर को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करता है।
मैच की शुरुआत से पहले कप्तान को इन बातों की लिखित पुष्टि करनी चाहिए:
- प्रति पारी ओवरों की संख्या और गेंद बदलने की शर्त।
- पावरप्ले तथा क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध।
- बारिश की स्थिति में संशोधित लक्ष्य की विधि।
- सुपर ओवर या टाई की स्थिति में विजेता तय करने का तरीका।
- डीआरएस उपलब्ध है या अंपायर का निर्णय अंतिम रहेगा।
- चोटिल खिलाड़ी, स्थानापन्न खिलाड़ी और विकेटकीपर बदलने की अनुमति।
स्थानीय आयोजक कभी-कभी 9 खिलाड़ियों की टीम, 8 खिलाड़ियों की सक्रिय भागीदारी, 10 मिनट की रिपोर्टिंग सीमा या छत के नेट से टकराने पर अलग रन जैसी शर्तें रखते हैं। ये नियम तभी मान्य और निष्पक्ष हैं जब कप्तानों को मैच से पहले बताए जाएँ। एमसीसी की भावना यही है कि खेल निष्पक्षता, अंपायर के अधिकार और स्पष्ट प्रतियोगिता-शर्तों पर चले। जैसा कि एमसीसी के नियमों में कहा गया है, “अंपायर का निर्णय अंतिम होगा।” इसका अर्थ यह नहीं कि हर गलती असंभव है; इसका अर्थ है कि मैदान पर निर्णय-प्रक्रिया के लिए एक स्पष्ट अधिकार-क्रम मौजूद है।
नियम कहाँ टिके?
गेंद की वैधता, रन की गणना और आउट के मूल सिद्धांत आधिकारिक क्रिकेट में सबसे स्थिर हिस्से हैं। वैध गेंद पर बल्लेबाज चौका लगाए तो चार रन और गेंद बिना जमीन छुए सीमा पार करे तो छह रन मिलते हैं; हालांकि नो-बॉल, वाइड, ओवरथ्रो या सीमा-रेखा से जुड़ी विशेष स्थिति में कुल रन अलग हो सकते हैं। कैच तभी वैध है जब क्षेत्ररक्षक गेंद पर नियंत्रण रखते हुए सीमा के भीतर रहे और गेंद जमीन को न छुए। रन आउट में विकेट गिरने से पहले बल्लेबाज का बल्ला या शरीर क्रीज के भीतर होना आवश्यक है। स्टंपिंग के लिए गेंद वैध या अवैध होने का प्रभाव, बल्लेबाज का क्रीज से बाहर होना और विकेटकीपर का गेंद पर नियंत्रण—तीनों देखे जाते हैं।
आउट के प्रमुख प्रकारों को याद रखने का व्यावहारिक क्रम यह है:
- बोल्ड: गेंद विकेटों को गिरा दे।
- कैच: बल्ले से लगने के बाद गेंद जमीन से पहले पकड़ी जाए।
- एलबीडब्ल्यू: गेंद बल्ले से न लगकर शरीर पर लगे और नियमों की आवश्यक शर्तें पूरी हों।
- रन आउट: बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो और विकेट गेंद से गिराया जाए।
- स्टंपिंग: विकेटकीपर गेंद पकड़कर क्रीज से बाहर बल्लेबाज का विकेट गिराए।
- हिट विकेट: बल्लेबाज अपने बल्ले या शरीर से विकेट गिरा दे।
- हिट द बॉल ट्वाइस और ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड: दुर्लभ, लेकिन नियमों में मान्य स्थितियाँ।
यहाँ एक उपयोगी सूचना-लाभ है जिसे कई शुरुआती लेख छोड़ देते हैं: फ्री हिट का अर्थ “कोई आउट नहीं” नहीं है। नो-बॉल के बाद अगली वैध डिलीवरी पर आम तौर पर बल्लेबाज को बोल्ड, एलबीडब्ल्यू, कैच या स्टंपिंग से सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन रन आउट जैसी स्थिति फिर भी संभव रहती है। दूसरा कम चर्चित तथ्य यह है कि गेंद बल्ले से न लगने पर भी बाई या लेग-बाई बन सकती है; लेग-बाई के लिए बल्लेबाज का शॉट खेलने का वास्तविक प्रयास या गेंद से बचने की परिस्थिति नियमों के अनुसार देखी जाती है। इसी कारण केवल गेंद शरीर से लगी देखकर लेग-बाई घोषित नहीं की जाती।
स्रोतों और निर्णय-संदर्भ को साथ पढ़ना चाहते हो तो यह सामग्री मदद करेगी।

नियम कहाँ टूटे?
क्रिकेट के नियम तब सबसे अधिक उलझते हैं जब स्थानीय आयोजक आधिकारिक नियमों में अपनी प्रतियोगिता-विशेष शर्तें मिला देते हैं। 16 ओवर के मैच में प्रत्येक पारी 8 ओवर की हो सकती है, पर हर ओवर की पहली और आखिरी गेंद के रन को दोगुना कर देना मानक क्रिकेट नियम नहीं है। उसी तरह “मैजिक ओवर” में तय लक्ष्य पूरा होते ही अतिरिक्त लाभ देना आयोजन का मनोरंजक प्रारूप हो सकता है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद या एमसीसी का सामान्य नियम बताना तथ्यात्मक गलती होगी। छत, जाल या पोल से टकराई गेंद पर 1, 2, 4 या 6 रन देने का निर्णय भी मैदान की घोषित सीमा-शर्तों से तय होगा। मेरे परीक्षण में सबसे ज्यादा विवाद उन मैचों में आया जहाँ कप्तानों ने नियम सुने थे, लेकिन लिखित प्रति नहीं देखी थी।
निर्णय लेने से पहले अंपायर और आयोजक को यह जाँच-सूची अपनानी चाहिए:
- क्या गेंद वैध डिलीवरी थी?
- क्या बल्लेबाज ने क्रीज पार की थी?
- क्या क्षेत्ररक्षक ने सीमा के भीतर गेंद नियंत्रित की?
- क्या अतिरिक्त रन पहले ही दिए जा चुके हैं?
- क्या प्रतियोगिता नियम आधिकारिक नियम से अलग है?
- क्या वीडियो समीक्षा या डीआरएस उपलब्ध है?
डीआरएस होने पर भी हर निर्णय स्वतः नहीं बदलता। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की प्रणाली में कप्तान की समीक्षा-सीमा, समय-सीमा, उपलब्ध तकनीक और मैदानी अंपायर का मूल निर्णय महत्वपूर्ण रहते हैं। स्थानीय टूर्नामेंट में डीआरएस न हो तो अंपायर का निर्णय अंतिम माना जा सकता है; इसलिए खिलाड़ियों को अपील की भाषा और समय पर ध्यान देना चाहिए। चोटिल बल्लेबाज के लिए रनर की अनुमति भी आधुनिक उच्च-स्तरीय क्रिकेट में सामान्य अधिकार नहीं है; प्रतियोगिता के नियम और मैच अधिकारी की स्वीकृति आवश्यक हो सकती है। इसी तरह स्थानापन्न क्षेत्ररक्षक बल्लेबाजी या गेंदबाजी नहीं कर सकता, जब तक नियमों में विशेष अपवाद न हो।
मैच विवाद कम करने के लिए आयोजक को टॉस से पहले एक पृष्ठ का नियम-पत्र देना चाहिए। उसमें रिपोर्टिंग समय, देर से पहुँचने पर कार्रवाई, टीम में खिलाड़ियों की संख्या, ओवरों की सीमा, बारिश का नियम, गेंद की स्थिति, सीमा-रेखा, छत या नेट से संपर्क, डीआरएस, चोट और टाई-ब्रेकर साफ लिखे होने चाहिए। दस मिनट की प्रतीक्षा के बाद विरोधी टीम को विजेता घोषित करना तभी उचित है जब यह शर्त पहले से प्रकाशित हो; मैच शुरू होने के बाद नियम बदलना निष्पक्षता को नुकसान पहुँचाता है। यही वह जगह है जहाँ आईपीएल समाचार की मैच समीक्षा उपयोगी बनती है—स्कोर से आगे जाकर वह बताती है कि निर्णायक मोड़ किस नियम ने बनाया।
इस हिस्से के बाद नियमों की व्यावहारिक सूची देखना सबसे अधिक लाभदायक है।
क्या मैं इसे फिर अपनाऊँगा?
हाँ, लेकिन केवल लिखित नियम-पत्र और स्पष्ट अंपायरिंग के साथ। क्रिकेट के नियम हिंदी में सीखने के लिए हर नियम रटने से बेहतर है कि दर्शक तीन परतों में तैयारी करे: पहले मानक नियम, फिर प्रारूप के नियम और अंत में स्थानीय आयोजन की विशेष शर्तें। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की टी-20 प्रतियोगिता, भारतीय प्रीमियर लीग और किसी स्कूल के 8-ओवर मैच को एक ही नियम-पुस्तिका से नहीं चलाया जा सकता। फिर भी वैध गेंद, रन, विकेट, सीमा-रेखा और अंपायर की भूमिका का मूल ढाँचा समान रहता है।
मेरी अंतिम व्यावहारिक सूची यह है:
- स्कोरबोर्ड में अतिरिक्त रन अलग से पढ़ो।
- नो-बॉल और वाइड को वैध गेंदों में मत गिनो।
- फ्री हिट को पूर्ण आउट-सुरक्षा मत समझो।
- कैच में गेंद पर नियंत्रण और सीमा-रेखा दोनों देखो।
- रन आउट में बल्ले का क्रीज के भीतर होना जाँचो।
- स्थानीय नियमों की लिखित प्रति टॉस से पहले माँगो।
- विवाद होने पर अंपायर के संकेत और गेंद की स्थिति दर्ज करो।
आँकड़ों की दृष्टि से भी यह पद्धति समझदार है: एक टी-20 पारी में 120 वैध गेंदों के बीच केवल एक नो-बॉल, ओवरथ्रो या गलत रन-कॉल कई बार परिणाम बदल सकती है। इसलिए नियमों का ज्ञान मनोरंजन के साथ रणनीतिक लाभ भी देता है। बल्लेबाज जोखिम वाले शॉट का अपेक्षित लाभ देखता है, गेंदबाज वैध गेंदों का दबाव बनाता है और कप्तान फील्ड प्रतिबंधों के भीतर विकल्प चुनता है। क्रिकेट में भावनाएँ जरूरी हैं, पर स्कोरकार्ड गणित से चलता है—मानो या न मानो, मैं मानता हूँ।

आईपीएल समाचार पर बल्लेबाजी रणनीति और गेंदबाजी योजनाएँ पढ़कर तुम नियमों को खेल-रणनीति से जोड़ सकते हो। एक अच्छा दर्शक केवल यह नहीं पूछता कि खिलाड़ी आउट है या नहीं; वह यह भी पूछता है कि गेंद वैध थी, निर्णय किस नियम पर आधारित था और उस निर्णय ने जीत की संभावना कितनी बदली।
निष्कर्ष के रूप में, क्रिकेट के नियमों को समझने का सर्वोत्तम तरीका आधिकारिक स्रोत, मैच-विशेष नियम और वास्तविक उदाहरण को साथ रखना है। अब अगला मैच देखते समय केवल चौका या विकेट मत गिनो; गेंद की वैधता, अतिरिक्त रन और अंपायर का संकेत भी दर्ज करो। यही अभ्यास तुम्हें दर्शक से समझदार क्रिकेट-पाठक बनाता है।
अपनी क्रिकेट समझ को और मजबूत करने के लिए यह अगला कदम उठाओ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट के नियम क्या होते हैं?
उत्तर: क्रिकेट के नियम खिलाड़ियों, गेंद, रन, विकेट, ओवर, मैदान और अंपायर के निर्णयों को नियंत्रित करने वाले आधिकारिक प्रावधान हैं। एमसीसी के नियमों में 42 मुख्य नियम हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और स्थानीय आयोजक प्रारूप के अनुसार अतिरिक्त शर्तें जोड़ सकते हैं। मानक मैच में 11 खिलाड़ियों की टीम, छह वैध गेंदों का ओवर और बल्लेबाजी तथा गेंदबाजी की बारी मूल आधार हैं। किसी प्रतियोगिता में अलग नियम हों तो टॉस से पहले उनका लिखित प्रकाशन आवश्यक है।
प्रश्न: क्रिकेट में रन कैसे गिने जाते हैं?
उत्तर: बल्लेबाज दौड़कर, चौका या छक्का लगाकर रन बनाता है, जबकि बाई, लेग-बाई, वाइड और नो-बॉल अतिरिक्त रन कहलाते हैं। चौके के लिए सामान्यतः चार और सीमा के बाहर बिना टप्पे की गेंद के लिए छह रन मिलते हैं। ओवरथ्रो में दौड़े गए रन और सीमा से मिले रन परिस्थिति के अनुसार जोड़े जा सकते हैं। स्कोरबोर्ड पढ़ते समय बल्लेबाज के रन और टीम के अतिरिक्त रन अलग-अलग देखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज की डिलीवरी से जुड़ी अवैध गेंद है, जबकि वाइड बल्लेबाज की सामान्य पहुँच से बाहर गई गेंद होती है। दोनों पर कम-से-कम एक अतिरिक्त रन मिलता है और दोनों वैध गेंदों की गिनती में शामिल नहीं होते। नो-बॉल के बाद सीमित ओवरों में अगली गेंद फ्री हिट हो सकती है, लेकिन फ्री हिट पर रन आउट संभव रहता है। वाइड पर बल्लेबाज के बल्ले से रन बनने या गेंद सीमा पार करने पर कुल रन बढ़ सकते हैं।
प्रश्न: बल्लेबाज किन तरीकों से आउट हो सकता है?
उत्तर: बल्लेबाज बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू, रन आउट, स्टंपिंग, हिट विकेट और कुछ दुर्लभ नियमों के तहत आउट हो सकता है। कैच में गेंद का जमीन से पहले नियंत्रण और क्षेत्ररक्षक का सीमा के भीतर रहना जरूरी है। रन आउट में विकेट टूटने से पहले बल्लेबाज का क्रीज से बाहर होना देखा जाता है। अपील के बाद अंपायर उपलब्ध प्रमाण और नियम के आधार पर निर्णय देता है; केवल जोरदार अपील अपने-आप आउट नहीं बनाती।
प्रश्न: क्या नो-बॉल पर बल्लेबाज रन आउट हो सकता है?
उत्तर: हाँ, नो-बॉल पर बल्लेबाज रन आउट हो सकता है। नो-बॉल बल्लेबाज को कुछ सामान्य आउट प्रकारों से सुरक्षा दे सकती है, लेकिन यदि बल्लेबाज रन लेने की कोशिश में क्रीज से बाहर है और क्षेत्ररक्षक सही तरीके से विकेट गिरा देता है, तो रन आउट दिया जा सकता है। ऐसे निर्णय में गेंद की स्थिति, विकेट टूटने का समय और बल्लेबाज के क्रीज में पहुँचने का क्रम देखा जाता है। फ्री हिट को पूर्ण सुरक्षा समझना आम गलती है।
प्रश्न: टी-20, एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट में क्या अंतर है?
उत्तर: टी-20 में प्रत्येक टीम को सामान्यतः 20 ओवर, एकदिवसीय में 50 ओवर और टेस्ट क्रिकेट में अधिकतम पाँच दिनों के भीतर दो पारियाँ मिल सकती हैं। सीमित ओवरों में लक्ष्य, रन-दर, पावरप्ले और टाई-ब्रेकर का प्रभाव अधिक होता है। टेस्ट में पारी घोषित करना, फॉलो-ऑन और समय-आधारित परिणाम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। स्थानीय प्रतियोगिता 8 या 16 ओवर रख सकती है, लेकिन उसे अंतरराष्ट्रीय प्रारूप का मानक नहीं माना जाना चाहिए।
प्रश्न: अगर स्थानीय मैच के नियम आधिकारिक नियमों से अलग हों तो क्या करें?
उत्तर: स्थानीय मैच में आयोजक द्वारा पहले से प्रकाशित प्रतियोगिता-विशेष नियम लागू होंगे, बशर्ते वे स्पष्ट और सभी टीमों को समान रूप से बताए गए हों। टॉस से पहले ओवर, खिलाड़ी संख्या, डीआरएस, बारिश, छत या नेट, देर से पहुँचने और टाई-ब्रेकर की शर्तें पढ़ लें। विवाद होने पर कप्तान अंपायर से शांतिपूर्वक नियम-पत्र का संदर्भ माँग सकता है। मैच शुरू होने के बाद एकतरफा नियम बदलना निष्पक्ष प्रक्रिया के विरुद्ध है।